पाली, 19 सितंबर। राजस्थान शिक्षक संघ (एकीकृत) के जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को शिक्षा में नवाचार, आधुनिक तकनीक, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण के साथ उनके नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
सम्मेलन का शुभारंभ समाजसेवी एवं विद्वान सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेश कुमार शर्मा, प्रधानाचार्य गंगाधर पाठक, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं महासंघ एकीकृत पाली के जिला अध्यक्ष जयनारायण कडेचा तथा जिला अध्यक्ष नन्दकिशोर शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्व का निर्वहन पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ करना चाहिए।

शिक्षा में एआई के उचित उपयोग पर जोर
हीराराम चौधरी ने कहा कि बदलते दौर में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। शिक्षकों को विद्यार्थियों की पढ़ाई में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का सावधानीपूर्वक और उचित उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई तकनीक के साथ शिक्षकों को भी निरंतर नई जानकारियों से अपडेट रहना होगा।
व्याख्याता सत्यनारायण राजपुरोहित ने विद्यार्थियों के प्रति सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार के उपाय बताते हुए कमजोर विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुसार सरल और प्रभावी तरीके से पढ़ाने की आवश्यकता बताई।
व्याख्याता राजेंद्र कुमार जैन ने विज्ञान विषय के प्रति विद्यार्थियों में रुचि पैदा करने के लिए नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों की जानकारी दी। वहीं चंदन सिंह राजपुरोहित ने कहा कि नैतिक शिक्षा की कहानियों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा और विशिष्ट क्षमताओं को पहचानकर उनके बौद्धिक विकास के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
सेवानिवृत्त व्याख्याता छगनलाल ने विद्यालयों के विकास में भामाशाहों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए शिक्षकों से अधिक से अधिक सहयोग लेने का आह्वान किया।
चंदन सिंह राजपुरोहित का सम्मान
सम्मेलन के दौरान संगठन के लिए उल्लेखनीय कार्य करने पर वरिष्ठ शिक्षक चंदन सिंह राजपुरोहित का साफा पहनाकर सम्मान किया गया।
नन्दकिशोर शर्मा फिर बने जिलाध्यक्ष
सम्मेलन में राजस्थान शिक्षक संघ (एकीकृत) की पाली जिला कार्यकारिणी का पुनर्गठन भी किया गया। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जयनारायण कडेचा की मौजूदगी में सर्वसम्मति से नन्दकिशोर शर्मा को पुनः जिलाध्यक्ष मनोनीत किया गया।
नवीन कार्यकारिणी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौतम मेवाड़ा, भगवान बाबाणी एवं संपत वैष्णव, जिला उपाध्यक्ष लोकेश पंवार, सुरेश जलवानिया, प्रदीप शर्मा प्रबोधक एवं दिलीप पटेल, जिलामंत्री जगदीश कुमार, जिला सचिव मोहम्मद आसिफ, जिला कोषाध्यक्ष विक्रम सिंह पंवार, संगठन मंत्री दुर्गा सिंह राठौड़, राजेश चौहान, राजू सिंह एवं लक्ष्मण कुमावत तथा महिला प्रतिनिधि नीता आसवानी और लिपिका सरकार को सर्वसम्मति से मनोनीत किया गया। सभी नवीन पदाधिकारियों को संगठन के प्रति निष्ठा एवं जिम्मेदारी से कार्य करने की शपथ दिलाई गई।
स्थानांतरण नीति सहित विभिन्न मांगें उठाईं
सम्मेलन में शिक्षकों ने स्थानांतरण नीति बनाने, शिक्षकों की पदोन्नति समय पर करने, अनिवार्य टेंट परीक्षा निरस्त करने, पाली जिले में हेड टीचर पद का सृजन करने, प्रबोधकों को पदोन्नति के साथ उच्च पद पर पदस्थापन देने, दिव्यांग शिक्षकों को उनकी दिव्यांगता के अनुरूप इच्छित स्थान पर पदस्थापित करने, आरपीएमएफ कटौती में कमी करने तथा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने सहित विभिन्न मांगों पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन में जितेंद्र दवे, हरदीनराम माली, अश्विनी दवे, चुन्नीलाल मेघवाल, ओमप्रकाश पाण्डेय, मनोज अग्रवाल, संजय निम्बार्क, रमेशचंद्र मालवी, सुखदेव शर्मा, केशरसिंह, नरेश नरवाल, गणपत लाल पन्नू सहित बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अंत में जिलाध्यक्ष नन्दकिशोर शर्मा ने सभी अतिथियों, शिक्षक प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन दिलीप पटेल ने किया।
