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पाली, महिला एवं बाल विकास विभागए पाली द्वारा महिला सुरक्षा एवं जागरूकता के उद्देश्य से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी प्रस्तुत की गई हैए जिसमें एक युवती के संघर्ष और साहस को दर्शाया गया है।
*’रील्स की चमक और झूठे वादे’*
जिले में 21 साल की अंजलि की सुबह अक्सर मोबाइल की स्क्रीन पर स्क्रॉल करते हुए होती थी। रील्स की रंगीन दुनिया, महंगी गाड़ियां और ‘‘परफेक्ट लाइफ‘‘ दिखाने वाले वीडियो उसे अपनी ओर खींचते थे। एक दिन, उसकी एक रील पर राहुल नाम के एक लड़के का मैसेज आया।
राहुल की इंस्टाग्राम प्रोफाइल किसी राजकुमार जैसी थी-महंगी गाड़ियां, ब्रांडेड कपड़े और आलीशान रेस्टोरेंट की तस्वीरें। राहुल की मीठी-मीठी बातों ने जल्द ही अंजलि का दिल जीत लिया। जब राहुल ने शादी और सात जन्मों का वादा किया, तो अंजलि सब कुछ भूल बैठी। मैं तुम्हें दुनिया की हर खुशी दूंगा, अंजलि। बस मेरा साथ दो,‘‘ राहुल ने कहा था। अंजलि के माता-पिता ने इस अनजान रिश्ते का विरोध किया, लेकिन प्यार के असीमित अंधविश्वास में डूबी अंजलि ने एक रात अपने माता-पिता के खिलाफ जाकर घर छोड़ दिया और राहुल से शादी कर ली।
*’नर्क का हकीकतनामा’*
शादी के कुछ ही हफ्ते बीते थे कि अंजलि के सपनों का वो महल ताश के पत्तों की तरह ढह गया। जिसे वह अमीर बिजनेसमैन समझ रही थी, वह असल में एक बेरोजगार शराबी और सट्टेबाज निकला। उसकी प्रोफाइल की सारी तस्वीरें नकली और उधार की जिंदगी की थीं। अब राहुल का असली चेहरा सामने आ चुका था। वह रोज शराब पीकर आता और अंजलि से पैसों की मांग करता। अंजलि के मना करने पर शुरू हुआ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का एक ऐसा दौर, जिसने अंजलि को अंदर से तोड़ दिया। राहुल ने उसके सारे गहने बेच दिए और अब वह उसके मायके से पैसे लाने के लिए उस पर दबाव बना रहा था। अंजलि एक ऐसे नर्क में कैद हो चुकी थी, जहाँ से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।
*’उम्मीद की एक किरण’*
एक दिन, जब राहुल घर पर नहीं था, अंजलि ने हिम्मत जुटाई और किसी तरह पास के एक पुलिस थाने में संपर्क किया। वहाँ उसे महिला अधिकारिता विभाग के बारे में पता चला। वहाँ अंजलि की मुलाकात विभाग की प्रबंधक प्रियंका व्यास से हुई। प्रियंका जी ने अंजलि की आप बीती को बेहद संवेदनशीलता से सुना और उसे विष्वास बंधाते हुए कहा-‘‘डरो मत अंजलि, तुम अकेली नहीं हो। सरकार की 181 महिला हेल्पलाइन तुम्हारे जैसी महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए ही बनी है।‘प्रियंका जी ने तुरंत अंजलि का संपर्क सखी वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक देवी बामनिया से करवाया।
*’रेस्क्यू ऑपरेशन और नया सवेरा’*
जब अंजलि की उम्मीदें पूरी तरह खत्म होने लगी थीं, तब प्रियंका व्यास जी और देवी बामनिया जी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत स्थानीय पुलिस के साथ एक टीम बनाई। बिना वक्त गंवाए, पुलिस और सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने राहुल के ठिकाने पर छापा मारा और अंजलि को उस नर्क जैसी कैद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहुल को पुलिस ने उसकी हरकतों के लिए सलाखों के पीछे पहुँचाया। सखी सेंटर में अंजलि को न केवल सुरक्षित आश्रय मिला, बल्कि उसे कानूनी सहायता और काउंसलिंग भी दी गई, जिससे वह इस सदमे से बाहर आ सके। अंजलि की आँखों में अब आंसू तो थे, लेकिन वे लाचारी के नहीं, बल्कि आजादी और कृतज्ञता के थे। प्यार या सोशल मीडिया पर दोस्त बनाना गलत नहीं है, लेकिन आभासी दुनिया के पीछे छिपे चेहरों पर अंधविश्वास करना खतरनाक हो सकता है। किसी की ‘‘प्रोफाइल‘‘ देखकर उसकी असलियत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
याद रखें- यदि आप या आपके आस-पास कोई भी महिला ऐसी स्थिति या घरेलू हिंसा का सामना कर रही है, तो चुप न रहें। आपकी एक कॉल आपको नया जीवन दे सकती है।
महिला सुरक्षा हेतु 181 महिला हेल्पलाइन, 112 पुलिस आपातकालीन सेवा, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन सहित सखी वन स्टॉप सेंटर एवं पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनका आवश्यकता पड़ने पर लाभ उठाया जा सकता है।
