पाली कांग्रेस में बड़ा भूचाल: पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ सहित चार नेता 6 साल के लिए निष्कासित, महापौर चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज

पाली। नगर निगम महापौर चुनाव के बीच कांग्रेस पार्टी ने कड़ा अनुशासनिक रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी विरोधी गतिविधियों और अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ बगावत करने के आरोप में पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ सहित चार प्रमुख नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है। जिला कांग्रेस कमेटी, पाली के संगठन महामंत्री जोगाराम सोलंकी ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए हैं।

अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ खड़े होने पर गिरी गाज

जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पाली नगर निगम महापौर पद के लिए पार्टी द्वारा अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने और संगठन विरोधी गतिविधियों के जरिए पार्टी को नुकसान पहुँचाने के कारण यह कार्रवाई की गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्दलीय महापौर प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने के कारण पार्षदों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई और पार्टी संगठन की एकजुटता प्रभावित हुई।

इन चार नेताओं को किया गया निष्कासित

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर जिन चार नेताओं पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, वे इस प्रकार हैं:

1. राजबाला हिंगड़ — निर्दलीय महापौर प्रत्याशी, नगर निगम पाली
2. प्रदीप हिंगड़ — पूर्व चेयरमैन
3. हकीम भाई — अध्यक्ष, पाली शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी
4. सोहन पारख — वार्ड संख्या 41 से पार्षद प्रत्याशी (2026)

शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर हुई कार्रवाई

संगठन महामंत्री जोगाराम सोलंकी ने जानकारी दी कि यह निष्कासन कार्रवाई राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देशानुसार, पाली जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिशुपाल सिंह निम्बाड़ा के निर्देशन और पाली विधायक भीमराज भाटी की अनुशंसा पर की गई है।

‘किंगमेकर’ की बगावत से गरमाई सियासत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं और चुनाव प्रबंधन में माहिर माने जाते हैं। ऐसे में कांग्रेस से उनके निष्कासन और बागी तेवर अपनाने से पार्टी के भीतर चुनावी समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। महापौर चुनाव में जहां एक-एक वोट की कीमत है, वहां इस अंदरूनी कलह से कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।

बहरहाल, इस बड़ी कार्रवाई के बाद पाली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव के दौरान पार्षदों का झुकाव किस ओर रहता है।

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