पाली। ऑल राजस्थान एडवोकेट फेडरेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय अधिवक्ता कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ पाली-जाडन स्थित प्रसिद्ध ओम आश्रम में हुआ। सम्मेलन में राजस्थान के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अधिवक्ता एक मंच पर एकत्रित हुए। प्रदेशभर से आए अधिवक्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी के चलते यह आयोजन अधिवक्ताओं के महाकुंभ के रूप में नजर आया, जहां अधिवक्ता हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन किया गया।

राज्य स्तरीय अधिवक्ता कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अवतार पुरी (उताधिकारी, ओम आश्रम जाडन), फूल पुरी (महामण्डलेश्वर), राजेन्द्र पुरी (आचार्य), रणजीत जोशी (अध्यक्ष, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जोधपुर), राम मनोहर शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, जयपुर), रघु गौतम तथा दिलीप सिंह उदावत (अध्यक्ष, लायर्स एसोसिएशन जोधपुर), अध्यक्ष पी.एम. जोशी एवं सचिव मुकुल सोनी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

अभिभाषक मंडल पाली के अध्यक्ष पी.एम. जोशी ने अतिथियों का स्वागत उद्बोधन देते हुए सभी गणमान्य अतिथियों एवं राजस्थान के विभिन्न जिलों से पधारे अधिवक्ताओं का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेशभर से आए अधिवक्ताओं की उपस्थिति इस राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस को ऐतिहासिक बना रही है। उन्होंने अधिवक्ता एकता, संगठन की मजबूती तथा अधिवक्ता हितों की रक्षा के लिए इस प्रकार के आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया और सभी अधिवक्ताओं का कार्यक्रम में पधारने के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्य अतिथि अवतार पुरी उताधिकारी, ओम आश्रम जाडन एवं फूल पुरी महामण्डलेश्वर ने अपने संबोधन में “सत्यमेव जयते” के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था का मूल आधार सत्य और धर्म है तथा अधिवक्ता समाज न्याय की इस व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने अधिवक्ताओं से सत्य, न्याय और समाज सेवा के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
कोटा अभिभाषक मंडल पूर्व अध्यक्ष रघुनंदन गौतम ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की आवाज को बार काउंसिल एवं राज्य सरकार को अवश्य सुनना होगा। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक जिला स्तर पर बार काउंसिल के कार्यालय खोले जाने की आवश्यकता है, ताकि अधिवक्ताओं को अपने कार्यों के लिए दूर-दूर तक नहीं जाना पड़े।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज की आवाज को कोई दबा नहीं सकता, और अधिवक्ताओं के सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा के लिए सभी अधिवक्ता एकजुट हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अधिवक्ता वेलफेयर फंड में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इस राशि का उपयोग कहां और किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी स्पष्ट जानकारी अधिकांश अधिवक्ताओं को नहीं है। इसलिए वेलफेयर फंड में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
दिलीप सिंह उदावत ने संबोधन मे कहा कि अधिवक्ता हितों से जुड़े प्रत्येक विषय पर होने वाला विचार-विमर्श अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज की समस्याओं और मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार कर उन्हें स्वीकार करना चाहिए।
अभिभाषक मंडल टोंक के अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि अधिवक्ता कभी भी रिटायर नहीं होता, वह जीवनभर न्याय व्यवस्था की सेवा करता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एडीआर (ADR) कार्यालय खोलने से न्याय व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। छोटे-छोटे शहरों में कार्यरत अधिवक्ताओं को लगातार बढ़ती समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के समय राजनेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन अधिवक्ताओं के हितों की बात बहुत कम की जाती है। उन्होंने मांग की कि बार काउंसिल के चुनाव में प्रत्येक जिले से प्रतिनिधिमंडल का सदस्य होना चाहिए, ताकि सभी जिलों के अधिवक्ताओं की आवाज को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
कॉन्फ्रेंस के द्वितीय सत्र में अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर राकेश प्रजापत (अध्यक्ष, ब्यावर), विजयराज चौधरी (अध्यक्ष, बाली), देवेंद्र (अध्यक्ष, सोजत), मुकेश श्रीमाली (अध्यक्ष, देसूरी) तथा ललित दवे (अध्यक्ष, रानी) ने अधिवक्ता हितों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखते हुए अधिवक्ताओं की समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की।
जयपुर से राममनोहर शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि अधिवक्ताओं की हुंकार आज इस पवित्र नगरी से उठ रही है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को जागरूक करना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि अधिवक्ता समाज अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रह सके। उन्होंने कहा कि कई बार बार काउंसिल और राज्य सरकार अधिवक्ताओं की आवाज को दबाने का प्रयास करती है, लेकिन अधिवक्ताओं की एकता के कारण उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने अधिवक्ताओं से एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।
अभिभाषक मंडल अध्यक्ष पी.एम. जोशी एवं सचिव मुकुल सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य स्तरीय अधिवक्ता कॉन्फ्रेंस में प्रदेशभर से आने वाले अधिवक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके तहत अधिवक्ताओं के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर, आवास व्यवस्था तथा चिकित्सा काउंटर की समुचित व्यवस्था की गई, ताकि बाहर से आने वाले अधिवक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल पर सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है।
इस अवसर मदनलाल सोनी , महेन्द्र कुमार व्यास , सुमेर सिंह राजपुरोहित, कमलेश दवेरा , योगेन्द्र ओझा, चन्द्रभानु सिंह, महेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष जब्बरसिंह सिंह, सचिव मुकुल सोनी, कुन्दन चौहान, सद्दाम काजी, हेमाराम, दीपक सोनी, भवानी साहू, रिषभ, अल्ताफ, अर्जुन राठौड, उमेश सांखला, कुसुम लता, डिम्पल, प्रियंका, संतोष सहित अधिवक्ता मौजूद रहै।
