भारत अमेरिका ट्रेड डील भारत विरोधी,व्यापार ओर किसानों पर पड़ेगा असर,, शिशु पाल पाली जिला अध्यक्ष कांग्रेस

पाली
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित भारत – अमेरिका ट्रेड डील को व्यापार व किसान विरोधी बताते हुए ट्रेड डील को रद्द करने की मांग करते हुए पाली जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष शिशुपालसिंह निम्बाडा ने कहा कि यदि ट्रेड डील में कृषि और दुग्ध उत्पादों को इस व्यापार समझौते में शामिल किया जाता है, तो इसका सीधा प्रभाव देश के किसानों और पशुपालकों पर पड़ेगा, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। ट्रेड डील को लेकर मोदी सरकार का तुगलकी फरमान देश के करोड़ों किसानों को चिंतित करने वाला फैसला है। निम्बाडा ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश व प्रदेश के किसानों के हित में नहीं है। इससे सोयाबीन, मक्का, कपास उत्पादकों को भारी नुकसान हो सकता है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह डील दबाव में ली गई और इससे अमेरिका को भारत के बाजार में मनचाहे दरों पर निर्यात का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार इस समझौते के तहत भारत सरकार ने अमेरिका के लगभग 72 उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क कर दिया है, जिससे देश के किसानों, छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। निम्बाडा ने आरोप लगाया कि अमेरिका की सरकार अन्य देशों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाएगी, जबकि भारत के निर्यात पर अधिक शुल्क वसूले जाने की आशंका है। इससे भारत के वैश्विक निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और वित्त मंत्रालय को राजस्व हानि होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस डील का असर राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की आजीविका और कृषक उत्पादन क्षमता पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इतने बड़े आर्थिक निर्णय लेने से पहले विपक्ष को विश्वास में लिया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि आज कई किसान और मजदूर एमएसपी की गारंटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि यह डील किसानों की सभी फसलों पर MSP सुनिश्चित करने की लड़ाई को कमजोर करेगी। निम्बाडा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी भी सूरत में किसानों के अधिकारों और आजीविका पर आंच नहीं आने देगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस समझौते पर पुनर्विचार नहीं किया तो, कांग्रेस सड़क से संसद तक लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी पहले से ही महंगी लागत, कम समर्थन मूल्य और प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। ऐसे में इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय समझौते किसानों की मुश्किलें और बढ़ा देंगे। केंद्र सरकार ने पहले भी किसानों के खिलाफ तीन काले कृषि कानून लाए थे, जिनका देशभर में विरोध हुआ था

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